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सिहुडी केंद्र प्रभारी नारायण पटेल के हौसले बुलंद

अमानक धान के तौल के नियमो का उलघन

 

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सिहुडी खरीदी केंद्र के प्रभारी नारायण पटेल अपने आप में केन्द्र के बेताज बादशाह साबित होते दिख रहे क्योंकि यहां (केन्द्र) ना तो रेट लिस्ट ना तो कोई जुम्मेवार अधिकारी ना ही कोई पैमाना

कितनी मात्रा का लक्ष्य है? इन सभी का कोई भी विवरण कहीं प्रदर्शित नहीं है। यह सीधे-सीधे पारदर्शिता को खत्म करने और मनमानी के रास्ते खोलने जैसा

किसानों का आरोप है कि केंद्र में अमानक धान की भी तौल कराई जा रही है, जबकि सरकार इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश देती है कि अमानक धान की खरीद अलग प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। यहाँ बिना किसी जांच के, बिना सैंपल लिए, सिर्फ ‘मनमर्जी’ से अमानक धान की भी तौल हो रही है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना और बढ़ जाती है।

नोडल अधिकारी और सर्वेयर नदारद जिम्मेदारी किस पर

सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि केंद्र में ना नोडल अधिकारी मौजूद हैं और ना ही सर्वेयर। इनकी अनुपस्थिति का अर्थ है कि गुणवत्ता जांच नहीं हो रही, तौल की निगरानी नहीं, किसान की शिकायत पर सुनवाई नहीं, भुगतान प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की संभावना। सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी यदि मौके पर मौजूद ही नहीं हैं तो खरीदी की प्रक्रिया किसके भरोसे चल रही है? यह बड़ा सवाल है।

केंद्र प्रभारी नारायण पटेल के हौसले बुलंद  किसानों को दिया जा रहा धोखा

किसानों का कहना है कि केंद्र प्रभारी नारायण पटेल की मनमानी चरम पर है। नियमों को दरकिनार करते हुए वे जिस तरह से तौल, व्यवस्था और संचालन कर रहे हैं, उससे साफ है कि उन्हें न तो प्रशासन का डर है और न ही किसी शिकायत की परवाह। किसानों के अनुसार प्रभारी उन्हें प्रताड़ित करने जैसा व्यवहार करते हैं। उनकी बातें सुनते नहीं, उल्टा उलझ जाते हैं। कई किसान यह भी बताते हैं कि यदि कोई किसान अनियमितताओं की शिकायत करता है तो उसकी तौल रोक दी जाती है या अनावश्यक बहाने बनाकर उसे वापस लौटा दिया जाता है। यह व्यवहार सिर्फ गैर जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि किसानों का सीधा अपमान भी है।

*किसानों की परेशानियाँ मगर सुनने वाला कोई नहीं*

किसानों की समस्या यह है कि वे मजबूर हैं। धान बेचना है, घर का खर्च चलाना है, कर्ज चुकाना है। इसलिए वे मन मारकर इस अव्यवस्था में भी खड़े रहने को विवश हैं। शिकायत करने पर कार्रवाई की जगह उल्टा परेशानी बढ़ने का डर है। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे केंद्र प्रभारी और भी बेखौफ हो गए हैं।

कटनी ब्यूरो चीफ

सुरेन्द्र कुमार शर्मा

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